आदत

मोहन का मन रास्ते में ही छोड़कर उन्हे जाने कि आदत हैवो मेरे हर झूठ से खुश होती,जिसे हमेशा सच बोलने की आदत थी,वो एक आंसू भी गिरने पर खफा होती थी,जिसे तन्हाई में रोने की आदत थी,वो कहती थी की मुझे भूल जाओगे,जिसे मेरी हर बात याद रखने की आदत थी,हमेशा माफ़ी मांगने के... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ 9991428447
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[05 Jun 2010 10:11 AM]

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