हलाल हो गई कसक

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... तुम्हारी कसक मेरे घावों पर लगी उस बैंडेड की उधड़ी पैबंद है जहां से झांकता मेरा घाव अब लोगों को भी नज़र आने लगा है। ये घाव कभी सी नहीं सकेगा कोई, तुम्हारे अहसासों की पुलटिस (मरहम) बार-बार इन घावों को हरा करती रहेगी, ये टीस हमेशा उठती रहेगी। बार बार आवाज़... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[05 Jun 2010 09:13 AM]

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