'तुम मुझको, मैं तुम्हें सुलाऊँ'
तुम मुझको मैं तुम्हें सुलाऊँ भाग्य रूठ कर कहीं पड़ा हो जग, बिसरा कर दूर खड़ा हो तेरे नयनों की बाती से मन का दीप जलाऊँ तुम मुझको, मैं तुम्हें सुलाऊँ...
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योगेश शर्मा
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[05 Jun 2010 08:58 AM]



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