'वीर भोग्या वसुन्धरा' -यादवचंद्र के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" का अष्टम सर्ग
अनवरत के पिछले अंकों में आप यादवचंद्र जी के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" के सात सर्ग पढ़ चुके हैं। अब तक प्रकाशित सब कड़ियों को यहाँ क्लिक कर के पढ़ा जा सकता है। इस काव्य का प्रत्येक सर्ग एक पृथक युग का प्रतिनिधित्व करता है। युग परिवर्तन के साथ ही...
[पूरी पोस्ट]
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
poet
17
3
0
3
5
[05 Jun 2010 07:19 AM]



Shuffle








