सोचो-सोचो !!

अंधड़ ! सिर्फ मुद्दा उठाने व चिंता व्यक्त कर देने भर से,क्या सोचते हो देश-तंत्र सुधर जाएगा ?जाने-अनजाने ये विनाश का बीज जो बो रहे है,क्या पौधा बनके हमारे ही समक्ष आयेगा?सोचो-सोचो !लिख देने या फिर किसी एक के कहने भर से,क्या यह देश कभी सुधरने वाला है ?देश सुधारने... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

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[05 Jun 2010 07:05 AM]

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