मेरे बिना (कहानी)

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में शाम से अब तक तीन डिब्बी सिगरेट फूंक चुका हूँ ,मुह का स्वाद इतना कडुवा हो चुका है की सामान्य में मुह का स्वाद कैसा होता है याद ही नहीं ...शायद यही कडवाहट मेरी रगों में भी घुल गई है, बिना झुंझलाए बात नहीं कर पाता हूँ, विधि दो तीन बार खाने को पूछ चुकी है,... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

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[05 Jun 2010 06:33 AM]

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