संगेमरमर की नायाब इमारत की धड़कनें सुनों...

तस्वीरघर ताज के शहर से हूं। उस शहर से जहां तमाम छतों से ताज नज़र आ जाता है। छोटा सा शहर...छोटी ख़्वाहिशों वाला। अपने में सिमटा। उस दिन ..जिसकी ये तस्वीरें हैं...घर में बैठा हुआ था। अचानक...हल्की बूंदाबांदी हुई...मौसम का मिज़ाज बदला...बदली छाई। लगा ताज जाना... [पूरी पोस्ट]
writer प्रबुद्ध
views
15
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
6
[05 Jun 2010 02:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix