कान्हा की बाल-लीलाएं-4
मैया यशोदा जी की गोदि में आकर कान्हा वहीं पर पलने लगे । कोई भी यह न समझ पाया कि कान्हा तो स्वयं भगवान हैं । वे गोप-ग्वालों के संग मिलकर खेलते और खेल खेल में ही अपनी लीला भी दिखाते ।मां जसोदा का लाडला और बाबा नन्द की आंखों का तारा जो संपूर्ण स्र्ष्टि का...
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सीमा सचदेव
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[05 Jun 2010 00:51 AM]



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