मैं क्यों लिखता हूँ?
जी का जंजाल बन गया है ये सब, जब से घर वालों ने मेरा ब्लाग देख लिया। अच्छा हुआ अभी डायरी नहीं देखी…… लेकिन क्या भरोसा?! आज नहीं तो कल उनके हाथ लग ही जायेगी। इतनी बातें सुनने को मिल गयी कि ऐसा लगता है मानो हमने कोई गुनाह कर दिया, अक्सर रात में ही सबके सोने...
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Manish
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[04 Jun 2010 22:33 PM]



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