जब सारे मरीज़ ख़तम हो जाते है तब डाँक्टर जी जाते हैं ..

उडान पूरा एक घंटा बीत गया था और नम्बर आ ही नहीं रहा था. अभी पाँच मरीज और बचे थे फिर मेरा नम्बर आने वाला था. मैं कुछ जगहों पर खुद को असहाय पाती हूँ : डाँक्टर के क्लीनिक में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना; प्लेटफार्म पर ट्रेन के आने का इंतजार और ..... तीसरा... [पूरी पोस्ट]
writer Razia
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[04 Jun 2010 21:28 PM]

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