तुम-हम नहीं पाल सकते कबूतर

एकोऽहम् तुम-हम नहीं पाल सकते कबूतर सूचना प्रौद्योगिकी के विस्फोट ने दुनिया को गाँव में बदल दिया। अंगुलियों के पोरों पर दुनिया सिमट आई। ‘सात समन्दर पार’ वाले जुमले आज के बच्चों के लिए चुटकुले से अधिक नहीं रह गए। किन्तु उलटबासियाँ शायद सर्वकालिक होती हैं। यह अलग... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

जीवन का इन्‍द्रधनुष

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[04 Jun 2010 20:30 PM]

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