भरी दुनिया में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएं......आवाज़....'अदा' की...

काव्य मंजूषा आवाज़....'अदा' की...भरी दुनिया में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएंमुहब्बत हो गई जिनको वो दीवाने कहाँ जाएंलगे हैं शम्मा पर पहरे ज़माने की निगाहों केजिन्हें जलने की हसरत है वो परवाने कहाँ जाएंसुनाना भी जिन्हें मुश्किल छुपाना भी जिन्हें मुश्किलज़रा तू ही बता ऐ... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[04 Jun 2010 19:03 PM]

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