आरा में वह ‘पहली’ रात [बकलमखुद-138]
…धमकी देने वाले वाले उस रात ठीक १ बजे सचमुच वहाँ आये थे। उन्होंने गेट पर फायरिंग की, दरवाजा तोड़ा और टारगेट की हुई लड़की को बाहर तक खींच लाए। पूरी बिल्डिंग में किसी की हिम्मत नहीं पडी़ कि उनसे पंगा ले। तब ऊपर से हमारे साथी गया जी ने कट्टे से फायर मारा और...
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अजित वडनेरकर
बकलमखुद
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[04 Jun 2010 15:45 PM]



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