मंज़िल चलकर आयेगी तुम्हारे पास
अंधेरा बहुत गहरा होतो समझनासुबह क़रीब हैलड़ना नहीं तमस सेअपनी शक्ति जाया मत करना शून्य में इंतज़ार करना सूर्य के उगने काअंधेरा ख़ुद-ब-ख़ुदभाग खड़ा होगातुम्हारे रास्ते सेदुःख जब भी आएघबराना नहीं, विचलित मत होना सुख पास ही खड़ादेख रहा होगातुम्हारी बेचैनी...
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डा.सुभाष राय
kavita
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[04 Jun 2010 15:46 PM]



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