आवाज़

गूंजअनुगूंज / GUNJANUGUNJ एक झेन साधक की मृत्यु हुई । उसके आश्रम के निकट ही एक अंधा वृद्ध रहता था । साधक की शोकसभा में उसने कहा – “मैं जन्म से अंधा हूँ । लोगो के चेहरे नहीं देख सकता । लेकिन उनकी भावनाएँ उनकी आवाज़ से पहचान पाता हूँ । आमतौर पर मैं जब किसी को बधाई देते सुनता हूँ,... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bharti
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[04 Jun 2010 14:33 PM]

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