'वजूद-ए-हयात..'
..."बिखरे जज़्बात..सुलगी रूह..खूनी खंज़र..आलम सारा..कातिल मेरा..माँगता फिर रहा..वजूद-ए-हयात..कैसे करूँ इकरार..है मोहब्बत..फ़क़त तुझसे ही..ए-दिलदार..!!"......
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Priyankaabhilaashi
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[04 Jun 2010 14:08 PM]



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