वातानुकूलित कक्ष से ग्लोबल वार्मिंग की रपटः विश्व पर्यावरण दिवस 2010
धरती माँ का बढ़ता बुख़ार, और सारे ईलाज बेकार. मर्ज़ लाईलाज तो नहीं, लेकिन पहल कौन करे. समाज में आज भी ऐसे बच्चे कम हैं, जो माँ बाप के हुक़्म पर चौदह साल के लिए बिना कुछ सोचे जंगल चले जाते हैं, या फिर अंधे माँ बाप को कंधे पर लादे सारे तीरथ घुमा लाते हैं. आज...
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सम्वेदना के स्वर
ग्लोबल वार्मिंग
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[04 Jun 2010 14:12 PM]



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