फिर एक अहसास हुआ

चिंतन मेरे मन का आज कुछ गुमसुम सा थामन मे कुछ उतार चढाव सा थामन के भीतर कुछ ज्वार भाटा सा थाअहसास कुछ चावल आटा सा थाकुछ चुन सकता था कुछ सब मिला सा थावक्त भी कुछ हमसे जला भुना था हर रिश्ते पर कुछ प्रश्न खडे थेअपने ना जाने क्यो सडे पडे थेहम भी बस अनजान खडे थेअपनो से हम भी... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[04 Jun 2010 14:26 PM]

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