सफेदी............'तेज'
दिल में लगे खरोंचों को यादों में जिन्दा दागों कोसिराहने पड़े सपनों कोपोंछ दो मेरी इस सफेदी में लम्बी होती इन दोपहरी को सामने लिखी उधारी को उनकी दी हुई हर निशानी को पोंछ दो मेरी इस सफेदी में अब ना आयेंगे वो दुबारा इन...
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Tej Pratap Singh
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[04 Jun 2010 12:57 PM]



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