कोशिशों की अब भी आख़िरी तो साँस थी बची...
कुछ बातें बहुत विचलित कर देती हैं...जरा सी हार पर ये समझना कि ज़िन्दगी के सब रास्ते बंद हो गए...और जीवन जैसे अनमोल उपहार को तोड़ कर फेंक देना और मौत को गले लगा लेना...जब तक हार न मानो हार नहीं होती....बस ये प्रयास है छोटा सा..उनसे कहने का कि....कोशिशों की...
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दिलीप
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[04 Jun 2010 12:16 PM]



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