चंद्रमुखी का दान : शरतचंद्र
शरतचंद्र के विरुद्ध एक पत्रिका में लेख छपा। उसी के संबंध में आलोचना हो रही थी। अपने मित्रों की बैठक में शरत बाबू ने कहा-
मेरे विरुद्ध सबसे बड़ा अभियोग यह है कि मैं पापियों का चित्रण इतने मनोहर ढंग से क्यों करता हूं। लोगों का विश्वास है कि मैं पतिताओं का...
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[18 May 2010 19:46 PM]



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