कुछ बातें याद आती हैं...
कितनी बातें याद आती हैं...तस्वीरों सी बन जाती हैं...मैं कैसे इन्हें भूलूं..दिल को क्या समझाओंकितनी बातें कहने की हैं...होठों पे जो सहमी सी हैं...एक रोज़ इन्हें सुन लो..क्यूँ ऐसे गम सुम हो...क्यूँ पूरी हो न पायी दास्ताँ...कैसे आई हई ऐसी दूरियां .....
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abhi
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[19 Jan 2009 00:46 AM]



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