बिगड़ा मेरा नसीब

एहसास प्यार का.. बिगड़ा मेरा नसीब तो सब कुछ संवर गयाकाँटों पे मैं गिरा और ज़माना गुज़र गयातूफान से थक गया, मैंने पतवार छोर दी जब मैं डूब चुका, समंदर ठहर गयाटुकड़े तेरे वजूद के,फैले थे मेरे पासउनको समटने में, मेरा वजूद बिखर गया मंजिल को ठुंठता रहा, मुसाफिर ये क्या... [पूरी पोस्ट]
writer abhi
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[25 Feb 2010 08:29 AM]

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