खामोश रात
ये रात कितनी खामोश हैये रात कितनी तनहा..इस सर्द रात में,कुछ लम्हे आते,जाते हैं आँखों में...दिल की धड़कने भी,इस रात के सन्नाटे में..एक अजीब आवाज़ कर रही हो जैसे...तुम्हारा नाम ले रही हो जैसे...तुम्हे पुकार रही हो जैसे...नींद तो रूठी हुई है आज..आज वो...
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abhi
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[03 Jun 2010 12:55 PM]



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