बिखरे सितारे भाग ३:क्या करूँ?क्या करूँ?
( गतांक:शाम के साढ़े चार पाँच बजे के करीब दरवाज़े पे बज रही घंटी से मेरी आँख खुली...कमरे से बाहर निकलते ही मैंने ड्राइवर को आवाज़ दी..वह भी सो गया था...जब तक आया तब तक मैंने दरवाज़ा खोल दिया..और अपने सामने खड़े लोगों को देख हैरान रह गयी...! लोग क्या, अब जब...
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kshama
bahan.
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[04 Jun 2010 11:03 AM]



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