छिटपुट शेर !

अंधड़ ! सीने में संजोई तेरी याद, कैसे मैं भुला लूंगा,तुम जितने मर्जी गम दो, मैं मुस्कुरा लूंगा,गुजारिश बस इतनी है, तेरे चेहरे की रौनक न बुझे,अपने हिस्से के आंसू मुझे दे देना, मैं बहा लूंगा !!~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~खुशी सदा तेरे दर पे ठहर जाए, ये दुआ मांगता... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

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[04 Jun 2010 10:24 AM]

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