शायद कहीं ऐसी भी दुनिया होगी

प्रेम धुन शायद कहीं ऐसी भी दुनिया रही  हो की मीरा बेरोक नृत्य करती रही हो .ह्रदय  में उमड़ा हुआ अंतहीन सावन होता हो कलियाँ खिलती रहें फूलों पर ताउम्र योवन हो. पर्वत का पत्थर व्रक्षों का वोझ सहता हो वेखोफ़ जहाँ जीवन एक साथ रहता हो... [पूरी पोस्ट]
writer रूपम
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[04 Jun 2010 07:59 AM]

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