बेटी उदास है और माँ के हाथ कठोर

विनय पत्रिका दो कविताएँदिनों देश के दो बड़े दैनिक अखबारों में मेरी दो कविताएँ छपीं। एक कविता विष्णु नागर जी ने नई दुनिया में और दूसरी गीत चतुर्वेदी ने दैनिक भास्कर में छापी। इन कविताओं पर कई मित्रों और कुछ नए पाठकों के मेल आए। लोग बताते हैं कि इन अखबारों के करोड़ों... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व

दैनिक भास्‍कर

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[04 Jun 2010 05:59 AM]

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