ओकरे किरुआ परी

इयत्ता -- हरि शंकर राढ़ीउस समय लगभग साढ़े बारह बज रहे थे। धूप अपने पूरे यौवन पर थी। गर्मी से बुरा हाल था लेकिन इस सांस्कृतिक नगरी में बिजली गुल थी । भूख लगी हुई थी और हम खाना खाने एक होटल में गए। उसका इनवर्टर फेल हो चुका था और जेनेरेटर था नहीं । गर्मी से बैठा... [पूरी पोस्ट]
writer Hari Shanker Rarhi

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[04 Jun 2010 05:55 AM]

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