तुम नदी हो……..

Veena Swar तुम नदी हो बहो……. बहना तो प्रकृति है और तुम्हारी नियति भी जो चाहो बहा कर ले जाओ तिनका हो या काठ मर्ज़ी तुम्हारी तुम्हारा वेग तुम्हारा सम्बल है और,अपने प्रिय सागर से मिलने की आकुलता भी इसी आकुलता ने न जाने कितने पत्थर तराशे और न जाने कितने... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Veena Srivastava

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[04 Jun 2010 05:26 AM]

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