उदासी के मंज़र [गज़ल] - देवमणि पाण्डेय ...
उदासी के मंज़र मकानों में हैं के रंगीनियाँ अब दुकानों में हैं। मोहब्बत को मौसम ने आवाज़ दी दिलों की पतंगें उड़ानों में हैं। इन्हें अपने अंजाम का डर नहीं कई चाहतें इम्तहानों में हैं। न जाने किसे और छलनी करेंगें कई तीर उनकी कमानों में हैं। अतिरिक्त......
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[04 Jun 2010 03:30 AM]



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