एक रात तारों की छांह में
पिछले हफ्ते मुंबई में बहुत गर्मी रही। मानसून आने से पहले हर साल ऐसा होता है। ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है। नतीजतन पसीना थमने का नाम नहीं लेता। दिन में तो चलो धूप के कारण गर्मी मानी। पर रात में? रात में भी कोई राहत नहीं। तो ऐसी ही एक रात एक बजे पसीने से लथपथ घर...
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भुवेंद्र त्यागी
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[04 Jun 2010 02:17 AM]



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