कल ये कहानी फिर छेड़ेंगे

उम्मीद है तेज आवाज में बात करना सीख नहीं पाया और धीमी आवाज़ अब कोई सुनना नहीं चाहता। खामोशी से अपना काम करना सुस्त होने की निशानी है। चीखने से गले में खराश पैदा हो जाती है। बोलने से ज्यादा वक्त सोचने में बीतता है। सड़क पर चलते किसी शख्स को उसकी गलती के बावजूद भला... [पूरी पोस्ट]
writer सुबोध
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[04 Jun 2010 01:24 AM]

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