आइना वही रहता है चेहरे बदल जाते हैं
"क्या करना है साहब लड़के को ज्यादा पढ़ा लिखाकर? आखिर करना तो उसे किसानी ही है। चिट्ठी-पत्री बाँचने लायक पढ़ ले यही बहुत है।" यह बात हमसे गाँव के एक गरीब किसान ने कही थी जब हमने उसे अपने बच्चे को खूब पढ़ाने-लिखाने की सलाह दी थी।दूसरी ओर शहर में एक गरीब भृत्य...
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जी.के. अवधिया
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[04 Jun 2010 00:57 AM]



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