इससे बडी शर्म की बात और क्या हो सकती है - किशन कालजयी - सबलोग
सबलोग का यह दूसरा साल है। किशन कालजयी लगातार इसे एक जनोन्मुख पत्रिका के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य दिनमान की कमी पूरी करना है। अगर देश के अन्य इलाकों में हो रहे बदलावों पर भी यह पत्रिका अपना ध्यान दे पाती और क्षेत्रीयता की...
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[04 Jun 2010 00:50 AM]



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