और सुनो अनु
मैं अब भी लिखता हूँ तुम पर कवितायें , अनु जबकि तुम सुनती हो नवजात शिशु की सांसें पति के सीने पर सिर रख.मैं अब भी ढूंढता हूँ तुम्हारे लिए उपमाएं ,गढता हूँ टटके बिम्ब और बनाता हूँ नए-नए अर्थ तुम्हारे कहे उन्हीं पुराने शब्दों से .मैं अब भी मोड़ता हूँ पन्नों...
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prkant
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[03 Jun 2010 22:33 PM]



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