ज़िंदगी
आग लग जाये जहाँ में फिर से फट जाये ज़मीं।मौत हारी है हमेशा ज़िंदगी रुकती नहीं।।आँधी आये या तूफ़ान बर्फ गिरे या फिर चट्टान।उत्तरकाशी भुज लातूर सुनामी और पाकिस्तान।।मौत का ताण्डव रौद्र रूप में फँसी ज़िंदगी अंधकूप में।लाख झमेले आने पर भी बढ़ी ज़िंदगी छाँव धूप...
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श्यामल सुमन
कविता
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[03 Jun 2010 22:28 PM]



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