'जहाँ धुआं वहाँ आग निश्चित'
ऊपर लिखे अनुमान तंत्र का सहारा लेकरकई प्रश्नों के उत्तर ढूंढे जाते हैंपरन्तु अहंकार क़ी खोज में इस अनुमान से हमचूक जातें हैंहम अहंकार को आग समझतें हैंदरअसल अहंकार आग नही धुआं हैव्यक्तिगत देह और सामाजिक परिवेश क़ीअंतःक्रिया या अन्तःसम्पर्क से मन क़ीआग...
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Arun Khadilkar
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[03 Jun 2010 21:24 PM]



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