कातिल बना गयी

वीर की कलम से मेरी कमज़ोरी मेरा दामन जला गयी, मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी| मेरी मोहब्बत शायद काफी ना थी, मेरी फितरत मुझे नाकाबिल बना गयी| मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी… तुम मेरे नुस्क ना संभाल पाये, मेरी आवारगी मुझे साहिल बना गयी| मेरी खुदी मुझे... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[03 Jun 2010 21:19 PM]

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