खबरदार श्रीमान नेता जी

स्वार्थ सुनो नेता जी तुम क्यों एक नंगे बच्चे जैसा व्यवहार करते हो जो अपनी आँखें बंद कर लेता है और सोचता है कि अब उसे कोई नहीं देख रहा। तुमने कछुआ तो देखा ही होगा जो अपने खोल के अंदर घुस कर छिप जाता है और सोचता है कि खतरे से बच गया है। तुम [...]... [पूरी पोस्ट]
writer स्वार्थ

poetryIndiaLifeneta

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[03 Jun 2010 13:46 PM]

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