बारिश में भीगे... मैं और मेरी आवारगी.... -देव

मेरी दुनिया मेरा जहां.... यार आज कुछ मन ठीक नहीं लग रहा है.... कुछ सुस्ती सी आ रही है...हल्का बुखार सा लग रहा था सुबह सुबह... देव बाबु पहली बारिश में जरा छपका मारने निकल गए थे.... भूल गए थे की अब मुम्बई का पानी पीते हैं... बनारस का नहीं... सो भैया सर्दी तो लगनी ही थी.... वैसे शाम... [पूरी पोस्ट]
writer देव कुमार झा
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[03 Jun 2010 13:11 PM]

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