लाली पूरब की ना खोए, नवजीवन का श्वास बहे...

दिल की कलम से...  कुछ लाल रंग का उपयोग कर लिखा है उम्मीद है पसंद आये....हर पंक्ति में लाल शब्द या उससे जुड़े किसी शब्द का उपयोग किया है....एक छोटा सा प्रयोग और आवाहन... एक समय था लाली अद्भुत आसमान में सजती थी...सिंदूरी सी सांझ कभी तो भोर लालिमा रहती थी...मनुज धमनियों... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[03 Jun 2010 13:21 PM]

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