तेरा हिस्सा कोई
मेरे ज़हन से लिपटा तेरा हिस्सा कोई, लफ़्ज़ों की तलाश में भटकता किस्सा कोई| जब नोचती है दुनिया मेरे सहमे दिल को, मुझे सीने से लगा लेता है तेरा हिस्सा कोई| ज़ुल्म ए फ़िराक से कब टूटा है ‘वीर’, जोड़ देता है फिर खुदसे तेरा हिस्सा कोई|...
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वीर
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[03 Jun 2010 12:59 PM]



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