किस्तों में जिंदगी जीते हैं यहाँ लोग
1. आज के दौर में इन्सान कहाँ खोया है वह खुद को भूलकर क्यों गहरी नीद सोया है क्यों उठता नहीं है आज के दौर में वह शायद बूढ़े शरीर में वह दर्द लिए रोया है फिर ये आज का नौजवां कहाँ गुम है कुछ ना पूछो! वह इश्क के बाजार में खोया है. 2. किस्तों में जिंदगी जीते...
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aarya
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[03 Jun 2010 10:51 AM]



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