कवि को हक है थोड़ा खेले भी !

जनपद हर कवि को यह हक है कि वह भाषा में और अपनी कविता में थोड़ा खेले भी। बशर्ते वह खिलवाड़ न हो, बल्कि कविता में कुछ गहरे अर्थ और आशय वह उपस्थित कर सके। तभी कवि के खेलने की सार्थकता है। उदाहरण के लिए कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी की यह कविता। इसके लिखे जाने का वर्ष ही... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
views
11
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
5
[03 Jun 2010 10:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix