सोच रहा हूँ कि क्या लिखा जाए और क्यूँ लिखा जाए !!!
अब इसे मौसम का असर कहा जाए कि माहौल का; पता नहीं क्यों अब कुछ भी लिखने पढने को मन ही नहीं करता. शायद ब्लागिंग का वो पहले वाला रस अब चला गया है. पहले कभी कुछ लिखते थे तो चाहे उसे पढने वालों को बेशक आनन्द न आए लेकिन हमें लिखने में तो खूब आया करता था. लेकिन...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[03 Jun 2010 08:32 AM]



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