मैं बिखर जाता हूँ

वीर की कलम से तेरी खुशी में ही अपनी खुशी पाता हूँ, तुम सिमट जाओ मैं बिखर जाता हूँ| मिलूँ तुम्हे हर शय के कतरे में, यूँ तेरी खुदी में बरस जाता हूँ| तुम सिमट जाओ मैं बिखर जाता हूँ… है नहीं उम्र देने को पास मेरे, हाँ कुछ लम्हें ज़रूर चुरा लाता हूँ|... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[03 Jun 2010 07:42 AM]

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