मैं बिखर जाता हूँ
तेरी खुशी में ही अपनी खुशी पाता हूँ, तुम सिमट जाओ मैं बिखर जाता हूँ| मिलूँ तुम्हे हर शय के कतरे में, यूँ तेरी खुदी में बरस जाता हूँ| तुम सिमट जाओ मैं बिखर जाता हूँ… है नहीं उम्र देने को पास मेरे, हाँ कुछ लम्हें ज़रूर चुरा लाता हूँ|...
[पूरी पोस्ट]
वीर
poemhindi poetryshayarighazals
22
3
0
3
10
[03 Jun 2010 07:42 AM]



Shuffle








