लटकाना हमारी आदत में शूमार हो गया है.
आप मेरी और किसी बात से सहमत हों ना हों पर इस बात से तो सहमत होंगे ही कि हमें किसी भी चीज को लटकाने की आदत सी पड़ गयी है। मैं कंधे पर शाल या गले में टाई या खूंटी पर कपड़े लटकाने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं कुछ ऊंची आदतों की बात कर रहा था। जैसे किसी योजना की...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[03 Jun 2010 06:27 AM]



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