धर्मों के हाथ उगते हैं मानव शरीर से
धर्मों के हाथ उगते हैं मानव शरीर से। अधयात्म है जुड़ा हुआ मन के कुटीर से॥अन्तस की इन्द्रियों से नहीं जिनका कुछ लगाव, करते हैं दो शिकार वही एक तीर से॥लालित्य द्रौपदी का न कम हो सका कभी,लीला का है प्रसार जो लिपटा है चीर से॥विद्या शरीर की है अलग मन की है...
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युग-विमर्श
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[03 Jun 2010 04:52 AM]



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