मुद्दत बाद पहलु में सनम आया है

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में उसने हंसकर जब गले लगाया है आँखों में चाँद उतर आया है गालों में पड़े गहरे दो भंवर उनमें डूबकर कौन उबर पाया है कुछ हया उसकी अदा में शामिल है और कुछ अदा से वो शर्माती भी है कभी झिड़क देती है शरारत सेकभी तेवर नए दिखाती भी है कभी उँगलियों से सुलझा देती है कभी... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

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[03 Jun 2010 03:33 AM]

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